भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिगों में श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का दसवां स्थान माना गया है
मुंबई भ्रमण एवं सांई बाबा के दर्शन करने के लिए 7 मार्च 2018 को हम दिल्ली से मुंबई पहुचे । लेकिन एक मित्र के संदेश पर 8 मार्च को पहले त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन का अवसर मिला। उसके बाद भ्रमण व अन्य दर्शन । श्री केदारनाथ दर्शन के बाद यह दूसरा ज्योतिर्लिंग दर्शन था।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर:
त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर महाराष्ट् के नासिक
जिले में गोदावरी नदी के किनारे स्थित है । काले पत्थरों से बना यह मंदिर देखने में बेहद सुंदर नज़र आता है। मंदिर की नक्काशी भी अति सुंदर है।
मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- जो तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता है, यहां पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही विराजित हैं । अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों में केवल भगवान शिव ही विराजित हैं।
मंदिर में प्रवेश से पहले कुछ यात्री कुशावर्त कुंड में नहाते हैं और कुछ पंच स्नान करते हैं ।मंदिर में कुछ भक्त जन अपनी- अपनी मुराद पूरी करने के लिए कालसर्प शांति, त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबलि की पूजा संपन्न करवाते हैं।
यहां पर निकटवर्ती ब्रह्म गिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम है। ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिये चौड़ी-चौड़ी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद 'रामकुण्ड' और 'लष्मणकुण्ड' मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुँचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते हैं।
कथा :
प्राचीनकाल में त्र्यंबक गौतम ऋषि की तपोभूमि थी। अपने ऊपर लगे गोहत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए गौतम ऋषि ने कठोर तप कर शिव से गंगा को यहाँ अवतरित करने का वरदान माँगा। फलस्वरूप दक्षिण की गंगा अर्थात गोदावरी नदी का उद्गम हुआ। गोदावरी के उद्गम के साथ ही गौतम ऋषि के अनुनय-विनय के उपरांत शिवजी ने इस मंदिर में विराजमान होना स्वीकार कर लिया।
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