देशाटन : जनकपुर (नेपाल ) एवं सीतामढी विहार
दिनांक : 19-20.02.23 - day 3-4
जनकपुर : नेपाल
रामायण काल में मिथिला के राजा जनक की राजधानी का नाम जनकपुर था। आज जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किमी. दूर है। यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है।
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जानकी मंदिर / महल :
यह महल वह प्राचीन स्थल है जहाँ राजा जनक ने सीतादेवी को अपनी संतान के रूप में पाला था। मंदिर परिसर के भीतर सीता देवी के माता-पिता जनक महाराज और रानी सुनयना का एक छोटा मंदिर भी है।
मंदिर मे प्रवेश के साथ ही सफेद रंग में गुंबदों, खंभों और बरामदों के साथ ईमारत का एक स्पष्ट दृश्य दिखाई पड़ता है, जो एक शानदार महल जैसा दिखता है, जिसमें प्रवेश करने से पहले ही संरचना की भव्यता का सार मिल जाता है। यह 4800 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।
प्रवेश करने के लिए भूतल पर 30 मीटर ऊंचे धनुषाकार द्वार है । मंदिर की जटिल जालीदार खिड़कियों, रंगीन कांच, सुंदर चित्रों और मनोरम नक्काशी से सुशोभित है। मंदिर परिसर में राजा जनक, रानी सुनैना, भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और उर्मिला की मूर्तियाँ है ।
जनकपुरी में हुआ था राम-सीता का विवाह :
पौराणिक कहानियों के अनुसार जनकपुरी में राम-सीता का विवाह हुआ था । जहां बाद में जानकी मंदिर बना दिया गया। जनकपुर आज भारत और नेपाल के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में फैले हिंदुओं के लिए अहम तीर्थस्थलल में बदल चुका है।
विवाह मंडप :
जनक महल के उत्तर पश्चिम में सुंदर प्रांगण है, जिसमें विवाह मंडप है। जहाँ सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था । मंदिर में विवाह को दर्शाने वाला दृश्य देखने को मिलता है। जहां दोनों पक्षों के परिजन मौजूद हैं। स्तंभों पर देवताओं का चित्रण दिखाई देते हैं।
लक्ष्मण मंदिर - जनकमहल के ठीक सामने लक्ष्मण को समर्पित यह छोटा मंदिर है।
श्री राम मंदिर - जनकमहल के करीब स्थित भगवान राम सुंदर मंदिर है। यह मंदिर धनुषसागर झील के ठीक सामने स्थित है।
गंगासागर झील - जनकमहल के निकट एक विशाल प्रसिद्ध गंगासागर झील है। यहां शाम की गंगासागर आरती बहुत मधुर होती है।
धनुष सागर - श्री राम मंदिर के सामने यह विशाल प्रसिद्ध धनुषसागर झील है। कहा जाता कि इस झील का निर्माण तब हुआ था जब सीता स्वंयबर के दमय शिव के धनुष के टुकड़ों में से एक यहां से नीचे के क्षेत्रों में प्रवेश कर गया था।
धनुषधाम :( जनकपुर)
जनकरपुर से 24 किमी दूरी पर धनुषधाम स्थित है। मान्यता है कि जब भगवान राम ने शिव जी के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई वह तीन टुकड़ों में टूट गया। इस धनुष का एक हिस्सा उड़कर स्वर्ग पहुंचा। दूसरा हिस्सा पाताल में जा गिरा, जिसके ठीक ऊपर विशाल धनुष सागर है और तीसरा हिस्सा विशाल धनुष सागर जनकपुर के पास गिरा।
जनकपुर में अन्य मन्दिर :
सीतामढी : बिहार : सीता माता की जन्मस्थली
मां जानकी जन्मस्थली सीतामढ़ी जिले का एक पवित्र धार्मिक स्थल है। यहां पर मां जानकी जी का जन्म हुआ था। इस जगह को पुनौरा धाम के नाम से भी जाना जाता है।यहां पर आपको एक बहुत बड़ी झील देखने के लिए मिलती है। यह झील है।
सीतामढ़ी के पुनौरा नामक स्थान पर जब राजा जनक ने खेत में हल जोता था, तो उस समय धरती से सीता का जन्म हुआ था। सीता जी के जन्म के कारण इस नगर का नाम पहले सीतामड़ई, फिर सीतामही और कालांतर में सीतामढ़ी पड़ा।
जानकी मन्दिर सीतामढी :
जानकी मंदिर सीतामढ़ी का प्रमुख धार्मिक एवं पवित्र स्थल है। यह मंदिर सीतामढ़ी मुख्य शहर में स्थित है। यह स्थान जगत जननी मां जानकी की प्रकट स्थली होने के कारण विख्यात है। यहां पर एक सुंदर सरोवर, राजा जनक को हल चलाते एवं मां जानकी प्रकट होने का दृश्य युक्त प्रतिमा स्थित है।