सफरनामा : 0125 : स्नान : महाकुंभ : 2025                  

 

       स्नान : महाकुंभ : 2025
                 
       समय का खेल है जनाव !
        जितनी भी प्लानिंग कर लीजिए !!
        होता वही है जो प्रभु चाहता है !!!

महाकुम्भ की अद्भुत यात्रा : 

         तीर्थराज प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का आयोजन इस बार दिव्य और भव्य तरीके से हो रहा है। देशभर से करोड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन महाकुम्भ त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं।  

     प्रभु कृपा से 27 एवं 28 जनवरी को महाकुम्भ में अद्भुत अलोकित दृश्यों से परमानंद की अनुभूति का आनंद लिया। यह अद्भभूत, मंगलमय यात्रा, रोचक कारणों से महानतम यात्रा बन गई  इस लिए सिर्फ यात्रा के कुछ विशेष अंशो का उल्लेख है।

 पहले दिन :- चक्रव्यू जैसा 

       रेलवे स्टेशन से त्रिवेणी संगम घाट तक यात्रा सुगम रही। लेकिन इसके बाद !  सेक्टर 5 से 21 तक सभी अखाड़ों , महामंडलेश्वर, नागाओ, संतों के पंडालों का भर्मण कर सेक्टर 25 में जाना चक्रव्यू में फंसने की तरह हो गया।

   कारण !  

  अत्यधिक भीड़ , रास्ते व पुल का जगह जगह बंद हो जाना , सही मार्ग दर्शन देने वाला कोई नहीं, पुलिस भी नही , एवं  irctc के कर्मकारियों द्वारा सही मार्ग दर्शन न करना ।

अंतभला सब तो सब भला :

आखिर 6 घंटे में 18 किमी की दूूरी तय कर रात्रि विश्राम के लिए सेक्टर 25 में irctc की टेंट कलौनी पहुंचे। 

     प्रभु कृपा,

  किसी पर नाराज नहीं, थकावट महसूस नहीं,  सिर्फ हंसी व खुशी कि, बढ़ापे मे 1कप चाय 1 बिस्कुट खाकर बिना विश्राम किये 18 किमी चले ! इसी विषय व महाकुम्भ आने की खुशी में रात का समय आनंदमय व्यतीत कर जीवन का आनंद लिया। 

दूसरे दिन :- चक्रव्यू से बाहर निकलना जैसा

 वापसी की चिंता ! 

कारण !

29 जनवरी और 3 फरवरी को होने वाले शाही स्नान पर महाकुम्भ मेला क्षेत्र में 27 तारीख से वाहनों पर प्रतिबंध ,

अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की अचम्भी रेलम रेला भीड़ । 

दूसरी तरफ irctc का चक्रव्यू! 

यात्रियों के आने जाने के लिए ! 

कोई मार्ग दर्शन नही, कोई  व्यवस्था नहीं अन्य वैकल्पिक योजना नहीं। 

और रुकने पर!

किराया 20000/ रुपया प्रति दिन। कितने दिनों तक रुकना पड़े पता नहीं,  वापस जाने के लिए कोई साधन , मालूम नहीं। पूरा चक्रव्यू।

दूसरे दिन पैदल चलना !

      रेलवे स्टेशन तक  20 -22 किमी पैदल चलने की हिम्मत नहीं , मुख्य स्नान पर मौनी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़  से  बाहर निकलना किसी संग्राम से कम नहीं , और बाहर निकल कर समय पर रेलवे स्टेशन पहुंचना महा संग्राम से कम नहीं । 

परस्थिति बन रही थी !

"मझदार में लटकना" जैसा  ! 

"सनम न इधर के रहे न उधर"  के रहे ! 

 प्रभु कृपा !

  एक तरकीव काम कर गई। 

दो महानभावों से मुलाक़ात,

जिन्होने बड़े हिम्मत से अपनी मोटरसाइकिलों से श्रद्धालुओं की भीड़ , पुलिस के बैरियर  पर पुलिस के बिरोध का सामना करते हुए, पुल व कुंज गलियों से होकर 98 मिनट में 20 किमी की दूरी तय कर, समय से पहले प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर हमें पहुँचा दिया। 

इसके लिए दोंनो सज्जनों का आभार प्रकट कर धन्यबाद किया ।

 रेलवे स्टेशन पर व्यवस्था

रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के टिकट लेने, बैठने, बिठाने की बहुत सुंदर, एवं सुव्यवस्थिति व्यवस्था है।

  महाकुम्भ से घर वापसी 

    वापसी का समय  महाकम्भ में फंसने, गुम होने की चर्च्चा पर व्यंगात्मक मनोरंजन के साथ व्यतीत हुआ कि , यदि मोटर साईकिल से दोंनो सज्जन हमारी मदत नही करते तो क्या हाल होता  ?  महाकुम्भ की अपार भीड़ ?  वापस आने की भयंकर समस्या ? रेल, बस , जहाज फुल, यहां तक पहचने की समस्या ? इसी धुन में ठीक समय पर पहुंच गये घर।

निर्कर्ष :-

  इस बार के महाकुम्भ में मुख्य स्नान के समय जाना किसी संग्राम से कम नहीं है। और यदि आप पंडालों, अखाड़ों नगों के ओर महाकम्भू मेले के अंदर घूमने के चले गये तो वहां से अपने निर्धारित समय पर वापस रेलवे/बस स्टेशन आना किसी महा संग्राम से कम नहीं है। 

जो लोग शाही स्नान के दिन के हिसाब से स्नान करने के लिए जा रहे हैँ वह किसी योद्धा से कम नही है।  

मुख्य स्नान के 2-3 दिन पहले या बाद में महाकुम्भ में आना जाना व स्नान करना सुविधा जनक हो सकता है । आराम दायक यात्रा के लिए आने जाने की टिकट व रहने की अच्छी व्यवस्था करना किसी युद्ध से कम नहीं है। 

प्रभु सबका भला करे।